बिहार की राजनीति में छोटी पार्टियों की अहमियत
बिहार का राजनीति जोड़ घटाव केवल जेडीयू, बीजेपी या आरजेडी तक सीमित नहीं है. यहां छोटी लेकिन जातिगत और क्षेत्रीय आधार वाली पार्टियां भी बड़े दलों के लिए ‘किंगमेकर’ साबित होती रहती हैं. ये पार्टियां सीमित सीटों पर लड़कर भी सत्ता के समीकरण में अपनी हिस्सेदारी पक्की करती हैं. कहने का मतलब है कि बिहार की राजनीति में जहां बड़े दल सत्ता की कमान थामते हैं, वहीं छोटी पार्टियां सत्ता समीकरण बदलने में अहम भूमिका निभाती हैं.
छोटी पार्टियां अहम क्यों?
छोटे और गौण राजनीतिक दल प्रतिस्पर्धी और अस्थिर चुनावी लोकतंत्रों में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. जिसे अक्सर कम आंका जाता है, लेकिन ये दल राजनीतिक बहुलवाद में योगदान करते हैं. प्रतिनिधि लोकतंत्र को गहरा करते हैं. क्षेत्र विशेष के हितों और राष्ट्रीय राजनीति के बीच पुल का काम करते हैं.छोटे दलों का मामूली या सीमांत वोट शेयर वोटों को विभाजित कर बड़े दलों का खेल बिगाड़ते हैं या गठबंधन सहयोगी बनकर सरकार के कामकाज को प्रभावित करते हैं. बिहार का यह पैटर्न यूरोपीय राजनीति की तरह है. वहां पर छोटे दल चुनावी गठबंधनों को आकार देते हैं. बातचीत और आम सहमति बनाने के माध्यम से सियासी सौदेबाजी करते हैं.
जातिगत समीकरण छोटे दलों की ताकत
दरअसल, बिहार में जातीय पहचान राजनीति की नींव है. चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) दलित वोट बैंक पर पकड़ रखती है, तो जीतन राम मांझी की हम पार्टी महादलितों की आवाज मानी जाती है. वहीं, मुकेश सहनी की वीआईपी पार्टी मल्लाह और मछुआरा समुदाय में असर रखती है. जबकि उपेंद्र कुशवाहा की आरएलएसपी (अब जेडीयू में विलय) ओबीसी कुशवाहा वोट पर मजबूत पकड़ रखती थी.
जन सुराज पार्टी के प्रशांत किशोर पहली बार विधानसभा चुनाव में अपना असर छोड़ने के लिए पुरजोर कोशिश में जुटे हैं. विधानसभा उपचुनाव में रामगढ़, इमामगंज और बेलागंज में बड़ी संख्या में जन सुराज पार्टी ने वोट हासिल कर आरजेडी को सकते में डाल दिया. ये तीनों सीटें आरजेडी परंपरागत सीटों की तरह है. विकासशील इंसान पार्टी के प्रमुख मुकेश सहनी 12 से 13 प्रतिशत आबादी के प्रतिनिधित्व का दावा करते हैं.
देखन में छोटन लगे, घाव करे गंभीर
ये पार्टियां अक्सर 3 से 15 सीटें जीतकर भी सत्ता की दिशा तय कर देती हैं. वजह-बड़े दलों के बीच कांटे की टक्कर और इन पार्टियों के वोट बैंक का निर्णायक होना है. साल 2020 के विधानसभा चुनाव में ही जीतन राम मांझी और मुकेश सहनी तेजस्वी यादव का साथ दे देते तो नीतीश कुमार सीएम नहीं बन पाते.
गठबंधन राजनीति का केंद्र
बिहार में किसी भी गठबंधन के लिए ये पार्टियां ‘अनिवार्य सहयोगी’ बन चुकी हैं. एनडीए हो या महागठबंधन—दोनों ही पक्ष इन नेताओं को अपने पाले में रखने की कोशिश करते हैं, क्योंकि इनके बिना कई सीटों पर जीत मुश्किल हो जाती है.सांसद चिराग पासवान को 5.5 प्रतिशत से अधिक वोट मिले थे, जो एक बड़ा हिस्सा है और पलड़ा पलटने की क्षमता रखता है, जब उनकी पार्टी बिहार में 2020 के चुनावों में आधे से ज्यादा विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ा था और पार्टी प्रत्याशी को केवल एक सीट पर जीत मिली थी.
उपेंद्र कुशवाहा के राष्ट्रीय लोक मंच ने 2020 का चुनाव असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम के साथ गठबंधन में लड़ा था और उन्हें लगभग 1.75 प्रतिशत वोट मिले थे, जबकि सहनी की वीआईपी को 1.5 प्रतिशत और मांझी की हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा को एक प्रतिशत से भी कम वोट मिले थे. उपेंद्र कुशवाहा कुशवाहा (कोइरी) जाति के बड़े नेता हैं, जो बिहार की 8-9% आबादी है. कुशवाहा समुदाय खासकर पटना, नालंदा, भोजपुर, औरंगाबाद, रोहतास और बक्सर जिलों में प्रभावी है. भाजपा और जेडीयू के बीच उनकी स्थिति 'किंगमेकर' जैसी होती है, क्योंकि कुशवाहा वोट कई सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाते हैं.
भाकपा (माले) का अविभाजित बिहार के दिनों से ही कई स्थानीय गढ़ रहे हैं. पार्टी का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 2020 के चुनावों में रहा, जब उसने महागठबंधन के तहत 19 सीटों पर चुनाव लड़ा और 12 सीटें जीतीं. कांग्रेस ने 70 सीटों पर चुनाव लड़ा और 19 सीटें जीतीं, जबकि कांग्रेस को उससे केवल सात सीटें कम मिलीं.
जावेद अख्तर
बॉलीवुड के जाने माने गीतकार और स्क्रिप्ट राइटर जावेद अख्तर ने राजा रघुवंशी और सौरभ राजपूत की क्रूर हत्या के मामलों को लेकर लोगों में व्याप्त आक्रोश पर सोमवार को अपनी राय रखी. हाल ही में एक साक्षात्कार में जावेद अख्तर ने स्वीकार किया कि इन मामलों पर राष्ट्रीय प्रतिक्रिया के बारे में उनकी मिली-जुली विचारधारा बयां की. ‘जब महिलाओं को जिंदा जला दिया जाता है तो कोई आक्रोश क्यों नहीं?’
जावेद अख्तर ने ने पूछा, ‘इन दो महिलाओं ने अपने पतियों को मरवा दिया और समाज हिल गया. फिर ऐसी महिलाएं हैं जिन्हें हर दूसरे दिन जिंदा जला दिया जाता हैं. उन्हें हर दिन पीटा जाता है. फिर समाज आक्रोशित नहीं होता.’ उन्होंने तर्क दिया कि महिलाओं द्वारा हिंसा से सदमा और निंदा होती है, लेकिन देश भर में अनगिनत महिलाओं द्वारा लगातार झेले जा रहे दुर्व्यवहार पर अक्सर चुप्पी साध ली जाती है. ‘पुरुषों के अपराधों की बात करें तो समाज बेशर्म है’
स्क्रिप्ट राइटर अख्तर ने इस पाखंड की आलोचना करते हुए कहा कि समाज बेशर्म है. उनके अनुसार, जब पुरुषों ने पीढ़ियों से महिलाओं के खिलाफ क्रूरता की है, तो आक्रोश सीमित या पूरी तरह से गायब रहा है.
जावेद अख्तर ने सामाजिक दबाव का जिक्र करते हुए कहा कि दो औरतों ने हत्या की तो चौकिए पर, जो मर्द उससे शादी कर रहे हैं, उससे उसकी जू नहीं रेंगती. उन्होंने जांचकर्ताओं से यह भी आग्रह किया कि वे इस बात की जांच करें कि क्या इसमें शामिल महिलाओं को शादी के लिए मजबूर किया गया था.
उन्होंने सवाल किया कि क्या छोटे शहरों की युवतियों को विवाह व्यवस्था को नकारने की स्वायत्तता भी है, जो गहरे सामाजिक दबाव की ओर इशारा करता है.
SSC Protest Jantar Mantar
SSC Protest Jantar Mantar: Widespread protests broke out across the country on Thursday over alleged mismanagement in the ongoing SSC Selection Post Phase 13 recruitment exam, with aspirants and teachers converging at Jantar Mantar under a "Delhi Chalo" call to demand accountability and reform in the process. Protesters alleged administrative lapses, technical failures, and the use of force by police against peaceful demonstrators. The exam, which began on July 24 and is scheduled to conclude on August 1, has seen numerous complaints of abrupt cancellations, server crashes, unresponsive systems, and remote exam centres, located as far as 500 km from candidates' homes.
फाइल फोटो
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बार दिवाली देश की सुरक्षा में तैनात बहादुर जवानों के साथ मनाई. सोमवार को उन्होंने स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत पर नौसेना कर्मियों के बीच दिवाली सेलिब्रेट की. उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक पोत पर जवानों के साथ दिवाली मनाना उनके लिए गर्व और सौभाग्य की बात है.
समुद्र के बीच दिवाली का अनोखा अनुभव
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वह कल से नौसेना कर्मियों के बीच हैं और हर पल उनसे कुछ नया सीखने का अनुभव मिला. उन्होंने भावुक होकर कहा, “आपका समर्पण और अनुशासन इतना ऊंचा है कि मैं उसे पूरी तरह जी तो नहीं पाया, लेकिन उसे गहराई से महसूस किया है. मैं समझ सकता हूं कि समुद्र की कठिन परिस्थितियों में डटे रहना कितना चुनौतीपूर्ण होता है.” पीएम मोदी ने बताया कि रात में विशाल समुद्र की गहराई और सुबह उगते सूरज का नजारा देखकर उनकी दिवाली और भी खास बन गई. उन्होंने कहा कि समुद्र पर पड़ती सूरज की किरणें ऐसे लगती हैं, जैसे देश के वीर सैनिकों द्वारा जलाए गए दीये चमक रहे हों.
I am fortunate that this time I am celebrating this holy festival of Diwali among all you brave soldiers of the Navy", says Prime Minister Narendra Modi as he celebrates Diwali at INS Vikrant off the coast of Goa and Karwar
October 20, 2025#WATCH | "I am fortunate that this time I am celebrating this holy festival of Diwali among all you brave soldiers of the Navy", says Prime Minister Narendra Modi as he celebrates Diwali at INS Vikrant off the coast of Goa and Karwar pic.twitter.com/Df1hKpbkma
— ANI (@ANI) October 20, 2025
‘आईएनएस विक्रांत’ देश की शक्ति और आत्मनिर्भरता का प्रतीक
प्रधानमंत्री ने कहा कि आईएनएस विक्रांत भारत की बढ़ती सामरिक शक्ति और ‘मेक इन इंडिया’ की भावना का प्रतीक है. उन्होंने कहा, “आज मेरे सामने अनंत आकाश है और मेरे नीचे अनंत समुद्र और बीच में भारत की शक्ति का प्रतीक आईएनएस विक्रांत है. यह नज़ारा मुझे गर्व और ऊर्जा से भर देता है.” उन्होंने नौसेना कर्मियों की देशभक्ति की सराहना करते हुए कहा कि जब उन्होंने उन्हें देशभक्ति के गीत गाते और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की झलक दिखाते देखा, तो लगा जैसे वह खुद उस क्षण का हिस्सा हों. प्रधानमंत्री ने कहा कि समुद्र पर तैनात जवानों का समर्पण और साहस किसी युद्धभूमि के योद्धा से कम नहीं है.
देश के जवानों को पीएम मोदी का संदेश
अंत में प्रधानमंत्री ने सभी सैनिकों और देशवासियों को दिवाली की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वह हर साल दिवाली जवानों के बीच मनाते हैं क्योंकि यही असली “भारत की शक्ति” है. उन्होंने कहा कि देश के जवान जब सीमाओं पर चौकन्ने रहते हैं, तभी देशवासी अपने घरों में सुरक्षित और खुशहाल दिवाली मना पाते हैं.