How to start Datacenter or Domain and hosting business ?
Top Digital Marketing Companies
Top Flutter App Development Companies
How to earn money Online ?
How to start Ecommerce business ?
इंसानी खोपड़ियों से बने बर्तन, मानव त्वचा की कुर्सियां; अमेरिका का सबसे खौफनाक सीरियल किलर
BBDS App Download
× Bindass Bol Home About News Contact Search

चिराग, जीतन और मुकेश सहनी से लेकर कुशवाहा तक, बिहार की राजनीति में छोटी पार्टियां अहम क्यों?

बिहार की राजनीति में छोटी पार्टियों की अहमियत

बिहार की राजनीति में छोटी पार्टियों की अहमियत

बिहार का राजनीति जोड़ घटाव केवल जेडीयू, बीजेपी या आरजेडी तक सीमित नहीं है. यहां छोटी लेकिन जातिगत और क्षेत्रीय आधार वाली पार्टियां भी बड़े दलों के लिए ‘किंगमेकर’ साबित होती रहती हैं. ये पार्टियां सीमित सीटों पर लड़कर भी सत्ता के समीकरण में अपनी हिस्सेदारी पक्की करती हैं. कहने का मतलब है कि बिहार की राजनीति में जहां बड़े दल सत्ता की कमान थामते हैं, वहीं छोटी पार्टियां सत्ता समीकरण बदलने में अहम भूमिका निभाती हैं. 

छोटी पार्टियां अहम क्यों?

छोटे और गौण राजनीतिक दल प्रतिस्पर्धी और अस्थिर चुनावी लोकतंत्रों में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. जिसे अक्सर कम आंका जाता है, लेकिन ये दल राजनीतिक बहुलवाद में योगदान करते हैं. प्रतिनिधि लोकतंत्र को गहरा करते हैं. क्षेत्र विशेष के हितों और राष्ट्रीय राजनीति के बीच पुल का काम करते हैं.छोटे दलों का मामूली या सीमांत वोट शेयर वोटों को विभाजित कर बड़े दलों का खेल बिगाड़ते हैं या गठबंधन सहयोगी बनकर सरकार के कामकाज को प्रभावित करते हैं. बिहार का यह पैटर्न यूरोपीय राजनीति की तरह है. वहां पर छोटे दल चुनावी गठबंधनों को आकार देते हैं. बातचीत और आम सहमति बनाने के माध्यम से सियासी सौदेबाजी करते हैं. 

जातिगत समीकरण छोटे दलों की ताकत

दरअसल, बिहार में जातीय पहचान राजनीति की नींव है. चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) दलित वोट बैंक पर पकड़ रखती है, तो जीतन राम मांझी की हम पार्टी महादलितों की आवाज मानी जाती है. वहीं, मुकेश सहनी की वीआईपी पार्टी मल्लाह और मछुआरा समुदाय में असर रखती है. जबकि उपेंद्र कुशवाहा की आरएलएसपी (अब जेडीयू में विलय) ओबीसी कुशवाहा वोट पर मजबूत पकड़ रखती थी. 

जन सुराज पार्टी के प्रशांत किशोर पहली बार विधानसभा चुनाव में अपना असर छोड़ने के लिए पुरजोर कोशिश में जुटे हैं. विधानसभा उपचुनाव में रामगढ़, इमामगंज और बेलागंज में बड़ी संख्या में जन सुराज पार्टी ने वोट हासिल कर आरजेडी को सकते में डाल दिया. ये तीनों सीटें आरजेडी परंपरागत सीटों की तरह है. विकासशील इंसान पार्टी के प्रमुख मुकेश सहनी 12 से 13 प्रतिशत आबादी के प्रतिनिधित्व का दावा करते हैं. 

देखन में छोटन लगे, घाव करे गंभीर 

ये पार्टियां अक्सर 3 से 15 सीटें जीतकर भी सत्ता की दिशा तय कर देती हैं. वजह-बड़े दलों के बीच कांटे की टक्कर और इन पार्टियों के वोट बैंक का निर्णायक होना है. साल 2020 के विधानसभा चुनाव में ही जीतन राम मांझी और मुकेश सहनी तेजस्वी यादव का साथ दे देते तो नीतीश कुमार सीएम नहीं बन पाते.

गठबंधन राजनीति का केंद्र

बिहार में किसी भी गठबंधन के लिए ये पार्टियां ‘अनिवार्य सहयोगी’ बन चुकी हैं. एनडीए हो या महागठबंधन—दोनों ही पक्ष इन नेताओं को अपने पाले में रखने की कोशिश करते हैं, क्योंकि इनके बिना कई सीटों पर जीत मुश्किल हो जाती है.सांसद चिराग पासवान को 5.5 प्रतिशत से अधिक वोट मिले थे, जो एक बड़ा हिस्सा है और पलड़ा पलटने की क्षमता रखता है, जब उनकी पार्टी बिहार में 2020 के चुनावों में आधे से ज्यादा विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ा था और पार्टी प्रत्याशी को केवल एक सीट पर जीत मिली थी.  

उपेंद्र कुशवाहा के राष्ट्रीय लोक मंच ने 2020 का चुनाव असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम के साथ गठबंधन में लड़ा था और उन्हें लगभग 1.75 प्रतिशत वोट मिले थे, जबकि सहनी की वीआईपी को 1.5 प्रतिशत और मांझी की हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा को एक प्रतिशत से भी कम वोट मिले थे. उपेंद्र कुशवाहा कुशवाहा (कोइरी) जाति के बड़े नेता हैं, जो बिहार की 8-9% आबादी है. कुशवाहा समुदाय खासकर पटना, नालंदा, भोजपुर, औरंगाबाद, रोहतास और बक्सर जिलों में प्रभावी है. भाजपा और जेडीयू के बीच उनकी स्थिति 'किंगमेकर' जैसी होती है, क्योंकि कुशवाहा वोट कई सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाते हैं. 

भाकपा (माले) का अविभाजित बिहार के दिनों से ही कई स्थानीय गढ़ रहे हैं. पार्टी का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 2020 के चुनावों में रहा, जब उसने महागठबंधन के तहत 19 सीटों पर चुनाव लड़ा और 12 सीटें जीतीं. कांग्रेस ने 70 सीटों पर चुनाव लड़ा और 19 सीटें जीतीं, जबकि कांग्रेस को उससे केवल सात सीटें कम मिलीं.


BBDS Logo

Bindass Bol Dil Se

Written by: Dhirendra Mishra

14 Aug 2025  ·  Published: 00:40 IST

सीडीएस अनिल चौहान का कार्यकाल बढ़ा, 2026 तक बने रहेंगे देश के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ

जनरल अनिल चौहान

जनरल अनिल चौहान

भारत की सुरक्षा चुनौतियों और बदलते वैश्विक हालात को देखते हुएकेंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान के कार्यकाल को 2026 तक बढ़ा दिया है. यह कदम भारत की रक्षा नीतियों और सैन्य रणनीति में निरंतरता बनाए रखने के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है.

केंद्र सरकार ने अधिसूचना जारी कर जनरल अनिल चौहान का कार्यकाल दो साल और बढ़ाने का फैसला किया है. इसके तहत वे सितंबर 2026 तक चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ बने रहेंगे.

 क्यों अहम है यह फैसला

सीडीएस की भूमिका तीनों सेनाओं (थल, जल और वायु) के बीच तालमेल बैठाने और सैन्य सुधारों को आगे बढ़ाने में बेहद महत्वपूर्ण है. चीन और पाकिस्तान से जुड़ी चुनौतियों, रक्षा आधुनिकीकरण और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं को मजबूती देने में चौहान की भूमिका अहम रही है.

अनिल चौहान का करियर

जनरल अनिल चौहान ने 2022 में सीडीएस का पद संभाला था. इससे पहले वे भारतीय सेना के विभिन्न अहम पदों पर रह चुके हैं. वे पूर्वी सेक्टर में चीन सीमा से जुड़े ऑपरेशनों का भी अनुभव रखते हैं.

2026 तक की रक्ष के क्षेत्र में प्राथमिकताएं

तीनों सेनाओं में संयुक्तता (Jointness) लाना. थियेटर कमांड्स का गठन करना. स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देना. पड़ोसी देशों से सुरक्षा चुनौतियों का समाधान.


BBDS Logo

Bindass Bol Dil Se

Written by: Dhirendra Mishra

25 Sep 2025  ·  Published: 06:19 IST

भागलपुर में पकड़ी गई 2 पाकिस्तानी महिला, SIR की रिपोर्ट से बड़ा खुलासा

भागलपुर में दो पाकिस्तानी महिला के रहने से मचा हड़कंप

भागलपुर में दो पाकिस्तानी महिला के रहने से मचा हड़कंप

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले चल रहे वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) विवाद के बीच बड़ा वाला खुलासा हुआ है. केंद्रीय गृह मंत्रालय की जांच में सामने आया है कि टैंक लेन में इमराना खानम उर्फ इमराना खातून, पिता इबतुल हसन और फिरदौसिया खानम पति मो. तफजील अहमद ने गैर कानूनी तरीके से मतदाता पहचान पत्र बनवा लिए हैं. इस सूचना के बाद से भागलपुर पुलिस महकमे सकते में है. जिले में अवैध रूप से वीजा अवधि को ओवरस्टे कर रह रहे विदेशियों का पता लगाने का काम शुरू कर दिया है. जांच के दौरान भागलपुर में तीन पाकिस्तानी नागरिकों के रहने की पुष्टि हुई है. 

पुलिस के मुताबिक तीन में दो महिलाएं इशाकचक थाना क्षेत्र के भीखनपुर गुमटी नंबर 3 टैंक लेन में रह रही हैं. मंत्रालय की रिपोर्ट पर जब पुलिस मुख्यालय ने एसएसपी से जांच कराई तो हैरान करने वाले खुलासे हुए. इस खुलासे के बाद से स्थानीय लोगों में खौफ का माहौल है. लोगों का कहना है कि अब वे भी अपने घरों में सुरक्षित नहीं हैं. खास बात यह है कि इन दो महिलाओं के नाम पर मतदाता पहचान पत्र भी बन गए हैं. 

फिलहाल, स्पेशल ब्रांच की रिपोर्ट पर पुलिस मुख्यालय में सनसनी फैल गई है. स्पेशल ब्रांच के एसपी ने अब विस्तृत जानकारी देकर भागलपुर के डीएम और एसएसपी से जांच और सत्यापन कर आवश्यक कार्रवाई समेत विस्तृत रिपोर्ट तलब की है. भागलपुर के डीएम डॉ. नवल किशोर चौधरी ने बताया कि दोनों पाकिस्तानी महिलाओं का नाम मतदाता सूची से हटाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है.

1956 में वीजा पर आई थीं भारत 

गृह मंत्रालय की जांच में सामने आया कि टैंक लेन में इमराना खानम उर्फ इमराना खातून, पिता इबतुल हसन और फिरदौसिया खानम पति मो. तफजील अहमद के नाम से मतदाता पहचान पत्र बनाया गया है. प्रशासन के पास दोनों का इपिक नंबर है. रिपोर्ट में पाया गया कि रंगपुर निवासी फिरदौसिया 19 जनवरी 1956 को 3 महीने के वीजा पर भारत आई थीं. वहीं इमराना 3 साल के वीजा पर आई थी. इसके अलावा, पाक नागरिक मोहम्मद असलम 24 मई 2002 को दो साल के लिए भारत आया था. असलम ने भी अपना आधार कार्ड बनवा लिया है.


BBDS Logo

Bindass Bol Dil Se

Written by: Dhirendra Mishra

23 Aug 2025  ·  Published: 05:49 IST

क्यों बोले अमित मालवीय - BJP तोड़ सकती है कांग्रेस का 40 साल पुराना रिकॉर्ड?

बीजेपी नेता अमित मालवीय

बीजेपी नेता अमित मालवीय

भारतीय राजनीति में चुनावी दावों और बयानों की गर्मी बढ़ गई है. इसी बीच BJP आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने एक बड़ा दावा किया है. उनका कहना है कि आने वाले चुनावों में भारतीय जनता पार्टी कांग्रेस का 40 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ सकती है. मालवीय के मुताबिक पार्टी की लोकप्रियता, संगठन की मजबूती और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नेतृत्व क्षमता इसे संभव बनाती है.

अमित मालवीय ने अपने बयान में कहा कि भारतीय जनता पार्टी के लिए देशभर में सकारात्मक माहौल बना हुआ है. जनता अब राष्ट्रीय सुरक्षा, विकास और कल्याणकारी योजनाओं को प्राथमिकता दे रही है। इन मुद्दों पर BJP का प्रदर्शन सबसे मजबूत माना जाता है.

 कांग्रेस का 40 साल पुराना रिकॉर्ड क्या है?

कांग्रेस ने 1984 के लोकसभा चुनाव में भारी जीत दर्ज की थी, जब राजीव गांधी के नेतृत्व में पार्टी ने 400 प्लस सीटें हासिल की थीं. यह अब तक का सबसे बड़ा बहुमत माना जाता है. मालवीय का संकेत इसी रिकॉर्ड की ओर माना जा रहा है.

BJP किस आधार पर कर रही है दावा?

मोदी नेतृत्व में जनविश्वास बढ़ा है. गरीबों व किसानों के लिए योजनाओं का बड़ा असर. ओवैसी और क्षेत्रीय दलों की वजह से विपक्ष का वोट बिखराव. कांग्रेस की रणनीतिक कमजोरी और नेतृत्व संकट. BJP की बूथ से लेकर पन्ना प्रमुख तक मजबूत ग्राउंड ऑर्गेनाइजेशन.

कई चुनाव विश्लेषक मानते हैं कि BJP अपने मजबूत क्षेत्रों में और बढ़त लेने की तैयारी कर रही है. वहीं विपक्ष एकजुटता की कमी से जूझ रहा है. हालांकि, कुछ राजनीतिक विशेषज्ञों का मत है कि 1984 जैसा परिणाम आधुनिक राजनीति में कठिन है, लेकिन BJP का तर्क है कि मोदी फैक्टर इसे संभव बना सकता है.

मालवीय का निशाना कांग्रेस पर

उन्होंने कहा कि कांग्रेस आज भी 1984 जैसी संगठनात्मक क्षमता या जनाधार के बराबर नहीं है. उनके अनुसार "कांग्रेस लगातार कमजोर होती जा रही है. ऐसे में BJP देशभर में ऐतिहासिक जनादेश प्राप्त करने के लिए तैयार है."

किस रिकॉर्ड को तोड़ना चाहती है बीजेपी?

अमित मालवीय ने दावा किया है कि BJP तोड़ सकती है कांग्रेस का 40 साल पुराना रिकॉर्ड. 1984 में राजीव गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस को भारी जीत मिली थी. BJP ने विकास, सुरक्षा व कल्याण योजनाओं को बताया अपनी ताकत. कमजोर पड़ती कांग्रेस व विपक्षी एकता की कमी को BJP ने बताया फायदा.


BBDS Logo

Bindass Bol Dil Se

Written by: Dhirendra Mishra

18 Nov 2025  ·  Published: 06:53 IST